The following poem by Vashima Jain from Gurgaon, Haryana won Ten Thousand Rupees in Wingword Poetry Competition 2026.
सांवली हूँ, छोटी हूँ, शायद थोड़ी सी मोटी हूँ,
आँखों के नीचे डार्क सर्कल्स हैं
तो पैरों के नीचे दरारें
माथे और कमर पे
उम्र और दो डिलिवरीज़ अपने निशान छोड़ चुकी हैं
बालों की सफ़ेदी खिल-खिल के ख़ुद के वजूद का प्रमाण देती रहती है
तो मैं इन सबको कहती हूँ
इन छोटे से कंधों ने
बड़ी-बड़ी ज़िम्मेदारियाँ उठाई हैं
इन साँवले हाथों ने
माइंड-ब्लोइंग प्रेज़ेंटेशन्स बनाई हैं
आँखों के डार्क सर्कल प्रमाण हैं उन रातों का
जब बच्चे मेरे सोए नहीं, पर हाँ रोए भी नहीं
क्योंकि ये छोटी सी, मोटी सी, साँवली सी माँ उनके साथ थी
कई उतार-चढ़ाव देख लिए
इन क़दमों ने भी, शायद इसलिए ये एड़ियाँ
मुस्कुरा रही हैं
बाल मेरे तजुर्बे की चाँदी बिखेरते हुए
कुछ कह रहे हों मानो
चलो इन सबकी सुन ही लेती हूँ
और ख़ुद को शुक्रान और एहतराम भरा एक सलाम देती हूँ
सेल्फ-लोथिंग में दर्ज़नों दिन बिता दिए
अब सेल्फ-लव के लिए समय निकालूँगी
गिल्ट-ट्रिप पे तो काफ़ी बार हो आई
इस बार नॉर्थ-ईस्ट का ट्रिप प्लान करूँगी
दूसरों के अप्रूवल के लिए मॉडिफ़ाय होने की कोशिश की
अब जो आईने में खड़ी कम्प्लीट वुमन है
सिर्फ़ उसके आगे सिर झुकाऊँगी
वॉक ज़रूर जाऊँगी, हेल्दी खाना ज़रूर खाऊँगी
योग, प्राणायाम और थोड़ा पार्लर वाला टाइम
लेकिन किसी के अप्रूवल या वैलिडेशन के लिए नहीं
सिर्फ़ ख़ुद के लिए दोहराऊँगी
दोस्तों के साथ अनगिनत बातें, परिवार की ख़ुशियों का ध्यान, फ़िटनेस पे फ़ोकस,
लर्निंग गोल्स की ओर अग्रसर
ये सब करूँगी
पर इन सब से पहले “ख़ुद की फ़ेवरेट” बनके
ख़ुद से ही बेइंतिहान मोहब्बत करूँगी
बेबाक़, बेहिसाब, बेफ़िक्री वाली मोहब्बत
समय के साथ घटने नहीं, बढ़ने वाली मोहब्बत
एक माँ अपने बच्चों से जैसी करती है
वैसी ही अनकंडीशनल लव वाली मोहब्बत
चलो इसी पल से शुरू करते हैं…
आप बेहतरीन हो और आप मुकम्मल हो